बाल्यकाल की भक्ति
बाल्यकाल से ही श्री मोहनदास जी महाराज का मन भक्ति और भगवान की आराधना में रमा रहता था।
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॥ श्री मोहनदास जी महाराज की जय ॥
रूल्याणी धाम की पावन धरती, जहाँ संत शिरोमणि श्री मोहनदास जी महाराज की भक्ति, तप और बाल्यकाल की दिव्य स्मृतियाँ आज भी श्रद्धालुओं के हृदय में जीवंत हैं।
पावन इतिहास
राजस्थान के सीकर जिले के रूल्याणी धाम स्थित यह पावन जन्मस्थली संत शिरोमणि श्री मोहनदास जी महाराज की तप, भक्ति और त्याग की अमर स्मृतियों से जुड़ी हुई है।
उनके बाल्यकाल की भक्ति और श्री हनुमान जी के प्रति उनकी अद्भुत श्रद्धा से जुड़ी अनेक लोकमान्यताएँ आज भी इस भूमि को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान करती हैं।
संपूर्ण इतिहास पढ़ें →श्री मोहनदास जी महाराज
बाल्यकाल से ही श्री मोहनदास जी महाराज का मन भक्ति और भगवान की आराधना में रमा रहता था।
पढ़ें →लोकमान्यता के अनुसार बाल्यकाल में श्री हनुमान जी साधु के रूप में उन्हें दर्शन देते और उनके साथ खेलते थे।
जानें →यही पावन भूमि श्री मोहनदास जी महाराज की जन्मस्थली और उनकी बाल्यकालीन आध्यात्मिक स्मृतियों से जुड़ी है।
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